माना जाता है की आज की इस भांगम दौडी वाली दुनिया में धन के बिना मनुष्य को कई परेशानीयों का सामना करना पडता है । धन के बीना मनुष्य शरीर से, मन से, संबधो से भी मनुष्य अपने आप को दुखी मानता है।। देवी को धन की देवी माना जाता, जो अपने भक्तो पर सभी प्रकार के सुखो की वर्षा करती है ।।ऐसे माता महालक्ष्मी का प्रीय यंञ श्री धनलक्ष्मी यंञ।। इस यंञकी स्थापना और योग्य पुजा विधी करने से माता लक्ष्मी शीर्घ ही प्रसंन् होती है और मनुष्य पर उनकी दर पर उनकी कुपा प्राप्ती होती है, जीस के कारण मनुष्यो को भी धन की कोई परेशानी आती ही नही माना जाता है की, इस यंञ पर माता लक्ष्मी साकक्षात विराजमान होती हे, और अपने भक्ती को सुख समुध्दि ऐश्वर्या धन धान्य का वर्षाव करती है परंतु इसकी योग्य पुजा विधी करनी जरूरी होता है।। किसी भी शुक्रवार अष्टमी पौर्णिमा के दीन पुजा कर सकते हो साथ ही लक्ष्मी जी का धन प्राप्ती मंञ करना होता है, साथ ही इस के आठ ही दिशायों में तिल के तेल का दिया लगाना चाहीए। जीससे आठ ही दिशायों से लक्ष्मी प्राप्ती का मार्ग अपने आप asthalaxmi स्वयं खोल देति है और भक्तोपर माता लक्ष्मी का आर्शिवाद प्राप्त होता है