श्रूष्टी के हर एक वस्तु पर प्राणियों पर मनुष्य पर यहाँ तक की निर्जीव वस्तुओं पर भी आकाश स्थित ग्रह तारो का बहोत बडा प्रभाव होता हे । जन्म से लेके मुत्यू तक हा हमारा सफर नव ग्रहों के आधीन होता है। एसलिए इनकी कूपा दॄष्टि हमेशा हमारे पर बनी रहे इसलिए नवग्रह यंञ का नियमित पुजन या दर्शन करना चाहीए।। कुंडली के प्र‍थम स्थान पंचम स्थान और नवम स्थान के मालक ग्रह को दैवी ग्रह माना जाता है, अगर यह बलवान हो तो हमे अच्छे फल की प्राप्ती होती है परंतु अगर यह निर्बलली हो तो हमे बहोत सारी मुशकलीयाँ की प्राप्ती होती ही है परतु अगर यह निर्बली हो तो हमे बहोत सारी मुशकलीया का सामना करना पडता है इसलिए नवग्रह मंत्र का पाठ करना अनिवारिया है क्योंकी मनुष्य के जीवन में सुख दुख लाभ हानी जय पराजय आदिपर नवग्रहों का पुरा प्रभाव है।।